नशा चढ़ता है हम पर तुम्हे सोचने भर से....
मुलाकात का आलम क्या होगा खुदा खैर करे...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मुलाकात का आलम क्या होगा खुदा खैर करे...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
कारीगर हूँ साहब अल्फ़ाज़ो कीमिट्टी से
महफ़िलों को सजाता हूँ...
कुछ को बेकार
तो कुछ को कलाकार नज़र आता हूँ...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
महफ़िलों को सजाता हूँ...
कुछ को बेकार
तो कुछ को कलाकार नज़र आता हूँ...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मैं अक्स वहीं,
जिसकी पहचान हो तुम,...
मैं इश्क वहीं,
जिसकी इबाबत हो तुम,...
मैं सफर वहीं,
जिसकी मंजिल हो तुम,...
मैं इंतहा वहीं,
ज़िसमें बेइंतहा हो तुम.....!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
जिसकी पहचान हो तुम,...
मैं इश्क वहीं,
जिसकी इबाबत हो तुम,...
मैं सफर वहीं,
जिसकी मंजिल हो तुम,...
मैं इंतहा वहीं,
ज़िसमें बेइंतहा हो तुम.....!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मज़ाक तो हम बाद में बने,
पहले तो सबने अपना बनाया था...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
पहले तो सबने अपना बनाया था...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
तुम बात बेशक ना करना
मै जुल्फें तब भी सवारूंगा तुम्हारी...
तुमसे इश्क करने के लिए
तुम्हारा मुझसे बात करना जरूरी तो नहीं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मै जुल्फें तब भी सवारूंगा तुम्हारी...
तुमसे इश्क करने के लिए
तुम्हारा मुझसे बात करना जरूरी तो नहीं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
पूछना कभी उससे...
"क्या तुम शादी से पहले भी ऐसी ही थीं?"
यदि वह सच कह पाई, तो बताएगी तुम्हें
कि कितना बदला है उसने खुद कों,
सबको अपना बनाने के लिए
सबके साथ मुस्कुराने के लिए
नए लोगों से प्यार पाने के लिए
और एक अच्छी पत्नी और बहू कहलाने के लिए
अब तो प्यार की परिभाषा भी बदल गई है,
बस जो मिला,
उसे ही प्यार मान लिया,
और कहा, "सही है।"...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
"क्या तुम शादी से पहले भी ऐसी ही थीं?"
यदि वह सच कह पाई, तो बताएगी तुम्हें
कि कितना बदला है उसने खुद कों,
सबको अपना बनाने के लिए
सबके साथ मुस्कुराने के लिए
नए लोगों से प्यार पाने के लिए
और एक अच्छी पत्नी और बहू कहलाने के लिए
अब तो प्यार की परिभाषा भी बदल गई है,
बस जो मिला,
उसे ही प्यार मान लिया,
और कहा, "सही है।"...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
जब भी अपनी मां की आंखों में देखता हूं...
तो मुझे लगता है की वो
मुझसे बेहतर बेटे की हकदार हैं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
तो मुझे लगता है की वो
मुझसे बेहतर बेटे की हकदार हैं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
टूट जाये न भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है ..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..
तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाले..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..
फूल होता तो तेरे दर पे सजा रहता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..
तू रुलाता है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..
खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है ..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..
तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाले..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..
फूल होता तो तेरे दर पे सजा रहता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..
तू रुलाता है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
ये दिल भुलाता नहीं है मोहब्बतें उसकी,
पड़ी हुई थी मुझे कितनी आदतें उसकी...
ये मेरा सारा सफर उसकी खुशबू में कटा,
मुझे तो राह दिखाती थी चाहतें उसकी...
काश एक खवाहिश पूरी हो,इबादत के बगैर,
वो आ कर गले लगा ले मेरी,इजाजत के बगैर...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
पड़ी हुई थी मुझे कितनी आदतें उसकी...
ये मेरा सारा सफर उसकी खुशबू में कटा,
मुझे तो राह दिखाती थी चाहतें उसकी...
काश एक खवाहिश पूरी हो,इबादत के बगैर,
वो आ कर गले लगा ले मेरी,इजाजत के बगैर...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
कुछ कमी सी लगती है तुम बिन
ना रंग है ना रोशनी है तुम बिन...
वक्त अपनी रफ्तार से चल रहा है
बस धड़कन थमी सी है तुम बिन...
ना बारिश है ना धुआं है फिर भी
दिल में तपिश सी है तुम बिन...
बहुत रोका है बादलों को बरसने से
फिर भी आंखों में नमी सी है तुम बिन...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
ना रंग है ना रोशनी है तुम बिन...
वक्त अपनी रफ्तार से चल रहा है
बस धड़कन थमी सी है तुम बिन...
ना बारिश है ना धुआं है फिर भी
दिल में तपिश सी है तुम बिन...
बहुत रोका है बादलों को बरसने से
फिर भी आंखों में नमी सी है तुम बिन...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
खिलें या ना खिलें
वो है फूलों का नसीब...
तेरा काम है पानी देना
तू तो अपना काम कर...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
वो है फूलों का नसीब...
तेरा काम है पानी देना
तू तो अपना काम कर...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
उसने मुझे पढ़ा,
खूब पढ़ा,
शुरुआत में पूरे मन से पढ़ा,
लेकिन बाद में मेरे कुछ ऐसे पन्ने आए
जो उसको बोर करने लगे थे...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
खूब पढ़ा,
शुरुआत में पूरे मन से पढ़ा,
लेकिन बाद में मेरे कुछ ऐसे पन्ने आए
जो उसको बोर करने लगे थे...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
हंसने और हंसाने की आदत से
महसूर हुआ करते थे हम...
खुदा सलामत रखे उसे
जिसने हमें रोना सिखा दिया...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
महसूर हुआ करते थे हम...
खुदा सलामत रखे उसे
जिसने हमें रोना सिखा दिया...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
कभी मैं घुल जाता हूं
तेरे आंसुओ के जाम में...
कभी मैं जी जाता हूं
तेरे अश्कों के दीदार में...
कभी मैं डूब जाता हूं
तेरी यादों के अंबार में...
कभी मैं खो जाता हूं
तेरे लबों की पुकार में...
कभी मैं मर जाता हूं
तेरे इश्क की बौछार में...
कभी मैं लिख लेता हूं
तेरी धड़कनों की आवाज़ में...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
तेरे आंसुओ के जाम में...
कभी मैं जी जाता हूं
तेरे अश्कों के दीदार में...
कभी मैं डूब जाता हूं
तेरी यादों के अंबार में...
कभी मैं खो जाता हूं
तेरे लबों की पुकार में...
कभी मैं मर जाता हूं
तेरे इश्क की बौछार में...
कभी मैं लिख लेता हूं
तेरी धड़कनों की आवाज़ में...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
उजड़ के घर आई बेटी
और बेरोज़गार बेटे के कमरे का पंखा चले
तो बिल ज्यादा आता है...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
और बेरोज़गार बेटे के कमरे का पंखा चले
तो बिल ज्यादा आता है...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
घर छोड़कर बाहर आए तो समझे कि...
मम्मी का किचन सै बुलाकर चुप हो जाना
और पापा का बार-बार दौड़ाना भी
हमें अच्छा लग सकता है...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मम्मी का किचन सै बुलाकर चुप हो जाना
और पापा का बार-बार दौड़ाना भी
हमें अच्छा लग सकता है...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
पहनावे मैं अदब रखता हूं
लहजा जरा नरम रखता हूं...
ज़िद पर आ जाऊं
तो हर चीज से मुंह मोड़ लूं
मैं अपने अन्दर इतना सब्र रखता हूं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
लहजा जरा नरम रखता हूं...
ज़िद पर आ जाऊं
तो हर चीज से मुंह मोड़ लूं
मैं अपने अन्दर इतना सब्र रखता हूं...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
मत पूछ शीशे से
उसके टूट जाने की वज़ह....
उसने भी किसी पत्थर को
अपना समझ लिया होगा...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
उसके टूट जाने की वज़ह....
उसने भी किसी पत्थर को
अपना समझ लिया होगा...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
प्रेमिकाओं को मौका दो
तो मां के पैर भी चूम लेती है.....
एक पत्नी है जो कहती हैं
मां और मुझमें किसी एक को चुनो...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
तो मां के पैर भी चूम लेती है.....
एक पत्नी है जो कहती हैं
मां और मुझमें किसी एक को चुनो...!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
चर्चाएं हो रही थी कि
शादी में व्यवस्था ठीक नहीं थी...
उधर एक बाप डायरी में लिख रहा था
किसका कितना उधार है....!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·
शादी में व्यवस्था ठीक नहीं थी...
उधर एक बाप डायरी में लिख रहा था
किसका कितना उधार है....!!
·—·—·—·—🖤🖤—·—·—·—·