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Yatra Includes
- 3rd AC Train
- AC Rooms
- AC Travel Bus
- Feast 3 Meal Prasadam
- Constant Kirtan And Katha
- Most Comfortable Devotional Yatra Ever
- First Time 3 temples in a day on Ekadashi

You can also have Jaipur and Vrindavan Separately or combined !!
*वृंदावन धाम यात्रा 2025*
आइये इस छुट्टी को वृंदावन की पवित्र भूमि पर *राधा रमण देव का प्राकट्य* (जन्मदिन) मनाकर मनाएं।
सीमित सीटें.. जितनी जल्दी हो सके बुक करें!

यात्रा तिथियाँ: 11 मई से 15 मई (5 दिन 6 रातें)

मुख्य गंतव्य:
वृंदावन के 7 मुख्य मंदिर 🛕
नंदगांव 🌿
बरसाना 🌸
गोवर्धन परिक्रमा (पैदल) 🌄
रावल 🏞
गोकुल 🏞
रमन रेती 🌾
और भी कई जगहें 🌏
कीमतें 💰
• ए.सी. ट्रेन/ए.सी. रूम - 7499 रुपये 🚆🏨
• स्लीपर ट्रेन/ए.सी. रूम - 5999 रुपये 🚂🏨
• बिना ट्रेन/ए.सी. रूम - 4999 रुपये 🚶‍♂🏨

इस यात्रा में क्या शामिल है:
👉ए.सी. ट्रेन/स्लीपर ट्रेन टिकट 🎫
👉A.C रूम 🛏
👉A.C बस 🚌
👉नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना 🍽
👉कथा और कीर्तन 🎤🕊

यात्रा का नेतृत्व श्रीपाद उद्धव प्रभुजी और एच.जी. कुंजवासिनी माताजी करेंगे 🙏

पंजीकरण शुल्क - 2000 रुपये (गैर-वापसी योग्य) प्रति व्यक्ति 💸

पंजीकरण फॉर्म 📋 -https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeJOSbiOY5Hw6uOezKBB9p0b5eZ5up9OXM3J1wzGoDz8xhxVA/viewform

आइये, इस पवित्र तीर्थयात्रा का हिस्सा बनें और भक्ति और दिव्य आशीर्वाद के एक आत्मा-उत्तेजक अनुभव पर चढ़ें! 🌼💖

अभी अपना स्थान बुक करें और इस अविस्मरणीय यात्रा का हिस्सा बनें! 🕊
हरे कृष्ण
सोमवार, *आमलकी एकादशी*

*पारणा:* मंगलवार सुबह
6:52 से 8:16 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात
7:07 से 8:16 राजकोट, जामनगर, द्वारका
Isckon Baroda Daily Darshan and Update WhatsApp Group
https://chat.whatsapp.com/K1pBwij2tzZD60F5JxlmWw


युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा: श्रीकृष्ण! मुझे फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम और माहात्म्य बताने की कृपा कीजिये।

भगवान श्रीकृष्ण बोले: महाभाग धर्मनन्दन! फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम ‘आमलकी’ है। इसका पवित्र व्रत विष्णुलोक की प्राप्ति करानेवाला है। राजा मान्धाता ने भी महात्मा वशिष्ठजी से इसी प्रकार का प्रश्न पूछा था, जिसके जवाब में वशिष्ठजी ने कहा था: ‘महाभाग! भगवान विष्णु के थूकने पर उनके मुख से चन्द्रमा के समान कान्तिमान एक बिन्दु प्रकट होकर पृथ्वी पर गिरा। उसीसे आमलक (आँवले) का महान वृक्ष उत्पन्न हुआ, जो सभी वृक्षों का आदिभूत कहलाता है। इसी समय प्रजा की सृष्टि करने के लिए भगवान ने ब्रह्माजी को उत्पन्न किया और ब्रह्माजी ने देवता, दानव, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, नाग तथा निर्मल अंतःकरण वाले महर्षियों को जन्म दिया। उनमें से देवता और ॠषि उस स्थान पर आये, जहाँ विष्णुप्रिय आमलक का वृक्ष था। महाभाग! उसे देखकर देवताओं को बड़ा विस्मय हुआ क्योंकि उस वृक्ष के बारे में वे नहीं जानते थे। उन्हें इस प्रकार विस्मित देख आकाशवाणी हुई: ‘महर्षियो! यह सर्वश्रेष्ठ आमलक का वृक्ष है, जो विष्णु को प्रिय है। इसके स्मरणमात्र से गोदान का फल मिलता है। स्पर्श करने से इससे दुगना और फल भक्षण करने से तिगुना पुण्य प्राप्त होता है। यह सब पापों को हरनेवाला वैष्णव वृक्ष है। इसके मूल में विष्णु, उसके ऊपर ब्रह्मा, स्कन्ध में परमेश्वर भगवान रुद्र, शाखाओं में मुनि, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण तथा फलों में समस्त प्रजापति वास करते हैं। आमलक सर्वदेवमय है। अत: विष्णुभक्त पुरुषों के लिए यह परम पूज्य है। इसलिए सदा प्रयत्नपूर्वक आमलक का सेवन करना चाहिए।’

ॠषि बोले: आप कौन हैं? देवता हैं या कोई और? हमें ठीक ठीक बताइये।

पुन: आकाशवाणी हुई: जो सम्पूर्ण भूतों के कर्त्ता और समस्त भुवनों के स्रष्टा हैं, जिन्हें विद्वान पुरुष भी कठिनता से देख पाते हैं, मैं वही सनातन विष्णु हूँ।

देवाधिदेव भगवान विष्णु का यह कथन सुनकर वे ॠषिगण भगवान की स्तुति करने लगे। इससे भगवान श्रीहरि संतुष्ट हुए और बोले: ‘महर्षियो! तुम्हें कौन सा अभीष्ट वरदान दूँ?

ॠषि बोले: भगवन्! यदि आप संतुष्ट हैं तो हम लोगों के हित के लिए कोई ऐसा व्रत बतलाइये, जो स्वर्ग और मोक्षरुपी फल प्रदान करनेवाला हो।

श्रीविष्णुजी बोले: महर्षियो! फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष में यदि पुष्य नक्षत्र से युक्त एकादशी हो तो वह महान पुण्य देनेवाली और बड़े बड़े पातकों का नाश करनेवाली होती है। इस दिन आँवले के वृक्ष के पास जाकर वहाँ रात्रि में जागरण करना चाहिए। इससे मनुष्य सब पापों से छुट जाता है और सहस्र गोदान का फल प्राप्त करता है। विप्रगण! यह व्रत सभी व्रतों में उत्तम है, जिसे मैंने तुम लोगों को बताया है।

ॠषि बोले: भगवन्! इस व्रत की विधि बताइये। इसके देवता और मंत्र क्या हैं? पूजन कैसे करें? उस समय स्नान और दान कैसे किया जाता है?

भगवान श्रीविष्णुजी ने कहा: द्विजवरो! इस एकादशी को व्रती प्रात:काल दन्तधावन करके यह संकल्प करे कि ‘ हे पुण्डरीकाक्ष! हे अच्युत! मैं एकादशी को निराहार रहकर दुसरे दिन भोजन करुँगा। आप मुझे शरण में रखें।’ ऐसा नियम लेने के बाद पतित, चोर, पाखण्डी, दुराचारी, गुरुपत्नीगामी तथा मर्यादा भंग करनेवाले मनुष्यों से वह वार्तालाप न करे। अपने मन को वश में रखते हुए नदी में, पोखरे में, कुएँ पर अथवा घर में ही स्नान करे। स्नान के पहले शरीर में मिट्टी लगाये।

मृत्तिका लगाने का मंत्र
अश्वक्रान्ते रथक्रान्ते विष्णुक्रान्ते वसुन्धरे।
मृत्तिके हर मे पापं जन्मकोटयां समर्जितम् ॥

वसुन्धरे! तुम्हारे ऊपर अश्व और रथ चला करते हैं तथा वामन अवतार के समय भगवान विष्णु ने भी तुम्हें अपने पैरों से नापा था। मृत्तिके! मैंने करोड़ों जन्मों में जो पाप किये हैं, मेरे उन सब पापों को हर लो।’

स्नान का मंत्र
त्वं मात: सर्वभूतानां जीवनं तत्तु रक्षकम्।
स्वेदजोद्भिज्जजातीनां रसानां पतये नम:॥
स्नातोSहं सर्वतीर्थेषु ह्रदप्रस्रवणेषु च्।
नदीषु देवखातेषु इदं स्नानं तु मे भवेत्॥

‘जल की अधिष्ठात्री देवी! मातः! तुम सम्पूर्ण भूतों के लिए जीवन हो। वही जीवन, जो स्वेदज और उद्भिज्ज जाति के जीवों का भी रक्षक है। तुम रसों की स्वामिनी हो। तुम्हें नमस्कार है। आज मैं सम्पूर्ण तीर्थों, कुण्डों, झरनों, नदियों और देवसम्बन्धी सरोवरों में स्नान कर चुका। मेरा यह स्नान उक्त सभी स्नानों का फल देनेवाला हो।’
*२० मार्च*
कृष्ण पर आश्रित रहिए, क्योंकि अंततः वह ही सभी परिस्थितियों के सर्वश्रेष्ठ स्वामी हैं। न कि डॉक्टर, या औषधि, या स्थान, अपितु यह कृष्ण ही हैं जो कि प्रत्येक वस्तु के स्वामी हैं।
*रायराम को पत्र, मार्च २०, १९६९*
हरे कृष्ण
मंगलवार, *पापमोचनी एकादशी*
*पारणा:* बुधवार सुबह
6:42 से 10:22 राजकोट, जामनगर, द्वारका

बुधवार, *पापमोचनी एकादशी*
*पारणा:* गुरुवार सुबह
6:37 से 10:40 वदोड़रा, सूरत, अमदावाद, खंभात

*Isckon Baroda Daily Darshan and updates Whatsapp*
https://chat.whatsapp.com/K1pBwij2tzZD60F5JxlmWw

युधिष्ठिर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की तो वे बोले: ‘राजेन्द्र! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था।’

मान्धाता ने पूछा: भगवन्! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया ये सब बातें मुझे बताइये।

लोमशजी ने कहा: नृपश्रेष्ठ! पूर्वकाल की बात है। अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी। वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे। मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी। मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये। मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी। मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे। रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा। इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये। मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई। जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन्! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये।’

मेघावी बोले: देवी! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो।

अप्सरा ने कहा: विप्रवर! अब तक न जाने कितनी ही संध्याँए चली गयीं! मुझ पर कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये!

लोमशजी ने कहा: राजन्! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे। उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये। उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया। उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी! तू पिशाची हो जा।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली: ‘विप्रवर! मेरे शाप का उद्धार कीजिये। सात वाक्य बोलने या सात पद साथ साथ चलनेमात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है। ब्रह्मन्! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन्! मुझ पर कृपा कीजिये।’

मुनि बोले: भद्रे! क्या करुँ? तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है। फिर भी सुनो। चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी।’ वह शाप से उद्धार करनेवाली तथा सब पापों का क्षय करनेवाली है। सुन्दरी! उसीका व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी।

ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये। उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा: ‘बेटा! यह क्या किया? तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला!’

मेघावी बोले: पिताजी! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है। अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय।

च्यवन ने कहा: बेटा! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा।

पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया। इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये। इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया। ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाचयोनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: राजन्! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है। ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं। यह व्रत बहुत पुण्यमय है।
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तैयार हो जाइए एक आत्मिक यात्रा के लिए, जो आपको जयपुर के भव्य शहर में 15 से अधिक दिव्य स्थल और ऐतिहासिक चमत्कारों की यात्रा कराएगी! 🙏

*एकादशी के दिन हम राधा गोविंद देव जी मंदिर, राधा गोपीनाथ देव जी मंदिर और राधा मदन मोहन मंदिर का दर्शन करेंगे—तीन पवित्र मंदिर जो शास्त्रों के अनुसार भक्तों को वैकुंठ पहुंचाने का विश्वास रखते हैं* । इस शुभ दिन पर आध्यात्मिक सुख और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का यह दुर्लभ अवसर न चूकें! 🙏

_*मुख्य स्थलों की सूची:*_

- राधा गोविंद देव जी मंदिर
- राधा गोपीनाथ देव जी मंदिर
- राधा मदन मोहन मंदिर
- राधा विनोद मंदिर
- जल महल
- हवा महल
- करौली
- जंतर मंतर
- *तारकेश्वर महादेव*
- और भी बहुत कुछ!

हम पवित्र मंदिरों, भव्य महलों और जयपुर की समृद्ध संस्कृति का अनुभव करेंगे, और इस यात्रा के दौरान हमें मार्गदर्शन मिलेगा एच.जी. उद्धव प्रभुजी और एच.जी. कुंजवसिनी माता जी द्वारा। 🌸🕊️

*_प्राइसिंग विकल्प:_*

- ए.सी. ट्रेन/ए.सी. रूम: ₹6999
- स्लीपर ट्रेन/ए.सी. रूम: ₹5499
- बिना ट्रेन/ए.सी. रूम: ₹4499

*इसमें क्या शामिल है:*

- ए.सी. ट्रेन/स्लीपर ट्रेन टिकट
- ए.सी. रूम आवास
- आरामदायक यात्रा के लिए ए.सी. बस
- स्वादिष्ट नाश्ता, लंच और डिनर
- कथा और कीर्तन से आत्मा की उन्नति

आध्यात्मिक सुख आपका इंतजार कर रहा है!
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं है; यह एक अविस्मरणीय यात्रा है भक्ति और दिव्य अनुभवों की। स्थान सीमित हैं, इसलिए इस आशीर्वादित यात्रा का हिस्सा बनने का अपना अवसर न खोएं! 🌟

_*रजिस्ट्रेशन विवरण:*_

- रजिस्ट्रेशन शुल्क: ₹2000 (नॉन – रिफंडेबल, प्रति व्यक्ति)
- स्पेस जल्दी भर रहे हैं! आज ही रजिस्टर करें और अपनी सीट सुरक्षित करें!

👉 *[रजिस्ट्रेशन फॉर्म लिंक]* https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeJOSbiOY5Hw6uOezKBB9p0b5eZ5up9OXM3J1wzGoDz8xhxVA/viewform?usp=sharing👈

आइए, इस यात्रा को एक जीवनभर के अनुभव में बदलें!
🌷🛕
Surrender your worries, let go of fears, and allow Krishna’s presence to fill your soul in Mangal Aarti 🙇‍♂️🙏
2025/04/06 14:26:54
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